77वां गणतंत्र दिवस 2026: भारत 77वां ही क्यों मना रहा है, 78वां क्यों नहीं?

जैसे-जैसे भारत 2026 में अपना गणतंत्र दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है, लोगों के मन में एक सवाल बार-बार आ रहा है: इस साल के गणतंत्र दिवस को 77वां क्यों कहा जा रहा है, जबकि कई लोगों का मानना ​​है कि यह 78वां होना चाहिए? यह कन्फ्यूजन हर साल होता है, लेकिन सही कैलकुलेशन का तरीका समझने के बाद वजह साफ हो जाती है।

77वां गणतंत्र दिवस 2026: 78वां क्यों नहीं?

भारत आधिकारिक तौर पर 26 जनवरी, 1950 को एक गणतंत्र बना। इस दिन, भारत का संविधान लागू हुआ, जिसने ब्रिटिश शासन के गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया एक्ट, 1935 की जगह ली। इस ऐतिहासिक दिन से, भारत एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य बन गया। महत्वपूर्ण बात यह है कि पहला गणतंत्र दिवस 26 जनवरी, 1950 को मनाया गया था। इसलिए, गिनती उसी साल से शुरू हुई, अगले साल से नहीं।

26 जनवरी को ही गणतंत्र दिवस क्यों मनाया जाता है?

26 जनवरी, 1930 को इंडियन नेशनल कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज (पूरा सेल्फ-रूल) का ऐलान किया था। इस ऐतिहासिक महत्व का सम्मान करने के लिए, 26 जनवरी को संविधान लागू करने की तारीख चुनी गई। संविधान का ड्राफ्ट लगभग 2 साल, 11 महीने और 18 साल बाद बनाया गया था।

  • 26 जनवरी, 1950 को भारत एक गणतंत्र बना।
  • इसी दिन भारतीय संविधान लागू हुआ।
  • डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति बने।
  • भारत सरकार अधिनियम 1935 को रद्द कर दिया गया।
  • जनता सर्वोच्च शक्ति बन गई।
  • इस दिन से, भारत ने खुद को कानून द्वारा शासित राष्ट्र घोषित किया।

गणतंत्र दिवस परेड का महत्व

नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर होने वाली परेड दुनिया के सामने भारत की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और उसके राज्यों की पहचान दिखाती है। यह सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय आत्मविश्वास का प्रतीक है।

2026 में गणतंत्र दिवस क्यों है खास?

आज, जब लोकतंत्र, अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस तेज़ हो रही है, तो गणतंत्र दिवस हमें याद दिलाता है कि:

  • संविधान कोई स्थिर दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि एक जीवित दस्तावेज़ है।
  • अधिकार तभी सुरक्षित होते हैं जब कर्तव्यों का पालन किया जाता है।
  • गणतंत्र सिर्फ़ एक उत्सव नहीं, बल्कि एक ज़िम्मेदारी है।

गणतंत्र दिवस परेड 2026 कहाँ होगी?

हर साल की तरह, गणतंत्र दिवस परेड 2026 नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर होगी। यह परेड भारत की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक झाँकियों और लोकतांत्रिक विरासत का एक भव्य प्रदर्शन है, जिसे न केवल देश बल्कि पूरी दुनिया देखती है। भारत और विदेश के गणमान्य व्यक्ति, सशस्त्र बलों के जवान, सांस्कृतिक दल और छात्र परेड में भाग लेंगे। 2026 को 77वाँ गणतंत्र दिवस कहना सही है, क्योंकि भारत ने अपना पहला गणतंत्र दिवस 1950 में मनाया था। यह दिन न केवल इतिहास की याद दिलाता है, बल्कि भारत के संविधान, लोकतंत्र और राष्ट्रीय एकता को भी ज़ोरदार तरीके से दिखाता है।

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